रुचिर शुक्ला
India Brazil Relation Brics Connection: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा को उनकी शानदार चुनावी जीत पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा -व्यापक बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं। ट्रंप के मुखर आलोचक लूला की ब्राजील में जीत भारत के लिए क्यों अहम है? इनसाइड स्टोरी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा एक बार फिर चुनावी जंग जीत चुके हैं। उन्होंने करीबी मुकाबले में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लेवियो बोल्सोनारो को शिकस्त दी है। लूला चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। उनकी ये जीत भारत के लिए कितनी महत्वपूर्ण है ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक्स पर सोमवार को किए गए पोस्ट से समझा जा सकता है। पीएम मोदी ने लूला को इस पोस्ट में अपना 'डियर फ्रेंड' बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई की दोनों देश मिलकर 'ग्लोबल साउथ' की उन्नति के लिए मिलकर काम करेंगे।
'माई डियर फ्रेंड' कहकर लूला को पीएम मोदी ने दी बधाई
पीएम मोदी ने लूला की जीत के बाद एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने लिखा, 'मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति लूला को शानदार पुनर्निर्वाचन पर हार्दिक बधाई। मैं भारत-ब्राजील की बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा तथा व्यापक बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को तत्पर हूं। हम साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करना जारी रखेंगे, 'ग्लोबल साउथ' की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे, और एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत तथा टिकाऊ दुनिया के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।'
लूला की जीत भारत के लिए क्यों है अहम
भारत के लिए, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला की जीत सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि यह एक प्रमुख द्विपक्षीय रिश्ते में निरंतरता बनाए रखती है। ये इसलिए भी अहम है क्योंकि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक हालात गंभीर बने हुए हैं। मिडिल ईस्ट में घमासान है, रूस-यूक्रेन में जंग जारी है। ट्रंप के टैरिफ दांव से व्यापार में भी तनाव देखने को मिल रहा है। उधर अमेरिका-चीन में प्रतिद्वंद्विता और वैश्विक व्यवस्था के भविष्य पर बहस अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को नया आकार दे रही है।
ब्राजील रहा है भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर
ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वो ब्रिक्स (BRICS) का साथी सदस्य है और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण आवाज है। लूला के सत्ता में लौटने के साथ, नई दिल्ली के पास इस साझेदारी को और गहरा करने का मौका है। ये एक ऐसी साझेदारी है जो व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और वैश्विक शासन जैसे कई क्षेत्रों तक फैली हुई है। लूला की जीत लैटिन अमेरिका में हो रहे व्यापक राजनीतिक बदलावों के बीच अहम है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी दक्षिणपंथी नेताओं का प्रभाव बढ़ा है।
ट्रंप समर्थक बोल्सोनारो को लूला ने दी शिकस्त
फ्लावियो बोल्सोनारो के चुनाव अभियान से यह संभावना बनी थी कि ब्राजील और वाशिंगटन के बीच राजनीतिक तालमेल और गहरा हो सकता है। इसके विपरीत, लूला के फिर से चुने जाने से उनकी उस नीति को निरंतरता मिली है, जिसमें वे रणनीतिक स्वायत्तता, बहुपक्षवाद और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते हैं। भारत ने वाशिंगटन और बीजिंग दोनों के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखने की कोशिश की है। इसके साथ ही 'ग्लोबल साउथ' के साथ अपने जुड़ाव का विस्तार भी किया है।
लूला भी रहे हैं भारत से मजबूत रिश्तों के समर्थक
राष्ट्रपति लूला फरवरी 2026 में भारत आए थे, जहां हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। दोनों नेताओं ने तकनीक, एआई, सेमीकंडक्टर, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि और 'ग्लोबल साउथ' के हितों को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उस समय साझा महत्वाकांक्षा को व्यक्त किया।
पीएम मोदी ने यूं ही नहीं किया ग्लोबल साउथ का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत और ब्राजील मिलकर काम करते हैं, तो 'ग्लोबल साउथ' की आवाज और अधिक मजबूत और आत्मविश्वास से भरी हो जाती है। रविवार को लूला डा सिल्वा की चौथी बार जीत से भारत और ब्राजील के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। पीएम मोदी ने भी सोमवार किए एक्स पोस्ट में भी आपसी रिश्तों को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का जिक्र किया है।
5 साल में द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब करने का लक्ष्य
भारत और ब्राजील में ट्रेड की बात करें तो दोनों देशों के आर्थिक संबंध एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2024 में 12.20 अरब डॉलर के मुकाबले, 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 25 फीसदी से अधिक बढ़कर 15.21 अरब डॉलर हो गया। 2026 के पहले छह महीनों में व्यापार लगभग 8.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 37 फीसदी की वृद्धि है। जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की ब्राजील यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। लूला की फिर वापसी इस रफ्तार को बनाए रखने का अहम अवसर प्रदान करेगी।
ब्राजील को भारत निर्यात करता है ये उत्पाद
भारत, ब्राजील को पेट्रोलियम उत्पाद, दवाएं, रसायन, कृषि-रसायन, इंजीनियरिंग सामान और कपड़ा निर्यात करता है। ब्राजील से भारत आने वाले सामानों में कच्चा तेल, सोयाबीन का तेल, चीनी, कपास और लौह अयस्क शामिल हैं। इस व्यापारिक आदान-प्रदान में विविधता लाने की काफी गुंजाइश है। भारतीय दवा कंपनियां ब्राजील में सस्ती दवाओं की पहुंच बढ़ा सकती हैं। ब्राजील की कृषि विशेषज्ञता और वहां के उत्पाद भारत की खाद्य और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में मददगार साबित हो सकते हैं।
ब्रिक्स की मजबूती में खास रोल निभाएगी लूला की जीत
ब्रिक्स के भविष्य को लेकर भी लूला का फिर से चुना जाना बेहद अहम है। यह एक ऐसा ग्रुप है जिसमें भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ़्रीका जैसी प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ कुछ नए सदस्य भी शामिल हैं। नई दिल्ली और ब्रासीलिया, दोनों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा ढांचे आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं को सही ढंग से नहीं दर्शाते हैं। सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की लंबे समय से चल रही दावेदारी इसे साझा हितों का एक महत्वपूर्ण विषय बनाती है।
करेंसी की चर्चा छेड़ लूला ने जब दिया स्पेशल मैसेज
लूला ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय करेंसी के अधिक इस्तेमाल का जिक्र किया है। फरवरी 2026 की अपनी यात्रा के दौरान लूला ने एक इंटरव्यू में कहा कि यह जरूरी नहीं है कि भारत और ब्राजील के बीच व्यापार समझौता अमेरिकी डॉलर में ही हो। हम अपनी खुद की मुद्राओं का उपयोग कर सकते हैं। यह मुश्किल है, लेकिन हम कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी एक साझा मुद्रा पर काम नहीं कर रहा है। उन्होंने एक साझा मुद्रा के विचार और द्विपक्षीय व्यापार को राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटाने की संभावना के बीच अंतर स्पष्ट किया।