ब्रिक्स पांच देशों के समूहों के तौर पर जाना जाता था. ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य थे. अब 2025 में ब्रिक्स 11 देशों का शक्तिशाली संगठन बन चुका है. इसके पांच अक्षर भले ही अब भी पहले जैसे ही हैं, लेकिन हाल के विस्तार ने इसे ग्लोबल मंच पर पहले से ज्यादा प्रभावशाली बना दिया है. 2023 और 2024 में हुए विस्तार के बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इंडोनेशिया के ब्रिक्स में शामिल होने से इसका महत्व बढ़ गया है.
ब्रिक्स समूह अब वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों का प्रतिनिधित्व करता है. यह G7 और विश्व बैंक जैसी पश्चिमी वर्चस्व वाली संस्थाओं की तुलना में एक वैकल्पिक मंच के रूप में उभर रहा है. BRICS का लक्ष्य वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक शासन में सुधार लाना और डी-डॉलराइजेशन को बढ़ावा देना है. इस संगठन का विस्तार केवल सदस्यों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल इकोनॉमी और जियोपॉलिटिक्स में एक नया बैलेंस स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
BRICS में नए सदस्यों का स्वागत
2023 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में BRICS ने 6 नए देशों- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अर्जेंटीना को पूर्ण सदस्यता के लिए आमंत्रित किया था. अर्जेंटीना ने 2023 में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद सदस्यता से इनकार कर दिया था. 2024 में इंडोनेशिया को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया, जिससे पूर्ण सदस्यों की संख्या 11 हो गई. सऊदी अरब ने अभी तक औपचारिक रूप से सदस्यता स्वीकार नहीं की है, लेकिन वह पार्टनर देश के रूप में एक्टिव है.
ब्रिक्स के पार्टनर देश
सऊदी अरब की तरह जनवरी 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को भी ब्रिक्स में ‘पार्टनर देश’ का दर्जा दिया गया. ये पार्टनर देश BRICS की विविध गतिविधियों में शामिल होते हैं लेकिन फुल टाइम सदस्यों की तरह उन्हें मतदान का अधिकार नहीं दिया जाता है. ये देश BRICS शिखर सम्मेलनों, बैठकों और आर्थिक/राजनीतिक चर्चाओं में भाग ले सकते हैं. यह दर्जा उन देशों के लिए है जो BRICS के उद्देश्यों से सहमत हैं और सहयोग भी करना चाहते हैं.
BRICS का उद्देश्य और प्रभाव क्या है?
BRICS का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल इकोनॉमिक और पॉलिटिकल सिस्टम में सभी को शामिल करना है. यह समूह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे वेस्टर्न डॉमिनेटेड संस्थानों के विकल्प के रूप में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को बढ़ावा देता है. NDB विकासशील देशों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस प्रदान करता है. BRICS डी-डॉलराइजेशन को प्रोत्साहित कर रहा है. इसके तहत सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं.
2025 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में क्या होगा?
2025 में ब्राजील की अध्यक्षता में रियो डी जनेरियो में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में कई बड़े मुद्दों पर फोकस किया जाएगा. इसमें क्लाइमेट चेंज, डिजिटल इकोनॉमी और ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म जैसे विषय शामिल होंगे. ब्राजील ने इशारा दिया है कि ब्रिक्स समूह के विस्तार को पहले से ज्यादा मजबूत करने और नए पार्टनर देशों को शामिल करने पर ध्यान देगा. BRICS का यह विस्तार ग्लोबल साउथ के देशों को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से उठा सकते हैं.
ग्लोबल स्टेज पर BRICS की भूमिका क्या है?
BRICS अब केवल एक इकोनॉमिक ग्रुप नहीं है, बल्कि जियोपॉलिटिकल स्ट्रैटेजी का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है. यह समूह G20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. नए सदस्यों के शामिल होने से BRICS की ग्लोबल एनर्जी मार्केट, फूड सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भूमिका काफी मजबूत हुई है. उदाहरण के लिए, ब्रिक्स में ईरान और UAE जैसे तेल उत्पादक देशों की मौजूदगी इस समूह को एनर्जी पॉलिसी के क्षेत्र में काफी प्रभावशाली बनाती है.